Saturday, June 6, 2015

हमारे काम आगे क्या होगा।

हमारा कल का discussion  था कि  बच्चों को आगे पढ़ाई से जोड़े रखने के लिय  छटी  से लेकर बारहवीं  कक्षा तक के बच्चों को ऐसी  शिक्षा प्रदान करना ताकि वे सेल्फ लर्नर बन सकें और फ्यूचर में उनहे ऐसी कोचिंग की ज़रूरत न पड़े जिस से उनकी सेविंग पर कोई प्रभाव पड़े और टुईटर के नाम पर जो लोग माता पिताओं से मोटा  पैसा ले रहे हैं उनसे वे बच सकें। .
  लेकिन जब L.I.  के एक बच्चे का  case  discuss हुआ जिसके पिता नही दो  बड़ी बहने हैं बहने बारहवीं पास है।  माँ  जिस माहौल में पली बड़ी है जो उसकी और उस जैसी अधिकतर माओं की सोच है , कि लड़िकयों का बाहर जाना सेफ नही है, लड़कियाँ बाहर जाएंगी तो बिगड़ जाएंगी ,आस पड़ौस वाले क्या कहेंगे।   हमारे दकयनूसी समाज में लड़कियों को पैदा इस लिए किया जाता है की बड़े होकर गाय की तरह किसी खूटे से बांध दिया जाये। उनके लिए जिंदिगी के ससारे दर वाज़े बंद सिर्फ एक ही रास्ता है शादी।
उस शादी के सपने को माँ बाप लड़की के बचपन से ही संजो कर रखते हैं।  और बड़े होने के बाद इसे पूरा करने के लिए अपनी जमा पूंजी जो शायद ही हो, खर्च कर देते हैं। जिन परिवारों में बाप का साया सर पर नही,या बाप की आमदनी न के बराबर है तो  सोचिय उनका क्या हाल होगा या लड़कियाँ घरों में बैठ कर शादी का इंतिज़ार करेंगी या फिर घर में मेहनत मज़दूरी करके अपना जहेज़ इकट्ठा करेंगीं जिससे उनकी सेहत और उम्र दोनों ही गिर जाएंगी , या  फिर उनके भाइयों को चाहे वो छोटे हों या बड़े अपनी फैमिली को सपोर्ट करने लिए ,माँ बाप का सपना पूरा करने केलिए, प्रयोग किया जायेगा क्यूंकी उनके पास कोई और ऑप्शन ही नही।
माँ बाप और उस मासूम लड़के को नहीं पता कि आज तो उसके हाथ से किताबें फिसल कर कुछ पैसे उसकी मुठ्ठी में आ जायेंगे  लेकिन कल उस  के हाथ से उसकी जिंदिगी फिसल जायगी तो उसे कौन सपोर्ट करेगा ? क्यूकी वह क़लम तो उससे बचपन में ही छीन लिया गया जिससे वह बच्चा अपनी जिंदिगी किताब  लिखता, उसमे नित नये रंग भरता, एक पक्षी की तरह खुले आसमान में उड़ता।
अब वह केवल एक बोझा उठाने वाली गाड़ी  है जिसे अपने परिवार को , शादी के बाद नये परिवार को , अपने बच्चों को ढोना है। उसे जिंदिगी जीनी नही गुज़ारनी है।
हमे डर है आज जिस बच्चे के लिए हम आगे  बढ़ने का सपना देख रहे है इस दक़यानूसी सोच के कारण कल एक बैल गाड़ी  बनकर न रह जाये  
क्यू उसने अपने माता पिता को स्पोर्ट देने के लिए अपने भविष्य के सपोर्टर को त्याग दिया ?
आज आप को घर घर में ऐसे बच्चे नज़र आएंगे, लड़के दसवीं बारह्वी से आगे बढ़ ही नहीं पाते क्यू?
पढ़ाई गरीबी दूर करती है। यह कैसी पढ़ाई है ? जो भविष्ये में हमे गरीबी के अनगिनत सायों को मंडराता दिखा रही है।
 पढ़ाई हमे क्या देगी ?बच्चे यह क्यू सोचने लगे हैं ?
हमे यह सोच बदलनी होगी और इसकी शुरुआत होगी घर से।
क्या आप इस सोच को बदलने में हमारी मदद करेंगे ?

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